DME Gas
LPG का देसी और सस्ता विकल्प पुणे के वैज्ञानिकों की ऐतिहासिक खोज
वैश्विक संकट की आँच अब रसोई तक
मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष यानी Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत की रसोई गैस आपूर्ति पर सीधा असर पड़ रहा है।
जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो सबसे पहले वह देश प्रभावित होते हैं जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं और दुर्भाग्य से भारत उनमें सबसे ऊपर है।
भारत अपनी कुल fossil fuel जरूरत का 80% से अधिक विदेशों से आयात करता है। अगर हम बात करें आयात का तो साल 2024 में अकेले LPG का आयात लगभग 2.1 करोड़ टन रहा ऐसे में जब कोई भी वैश्विक उथल-पुथल होती है तो करोड़ों भारतीय परिवारों की रसोई का चूल्हा सबसे पहले असुरक्षित हो जाता है।
इसी समस्या का एक देसी और वैज्ञानिक हल लेकर आई है पुणे की CSIR-National Chemical Laboratory (CSIR-NCL) एक ऐसा ईंधन जो LPG की तरह जलता है उसी cylinder में आता है और उतनी ही गर्मी देता है पर बनता है भारत की अपनी धरती पर।
मोटा मोटा अगर समझें तो
- 80%+ : भारत की Fossil fuel जरूरत विदेश से पूरी होती है
- Rs. 9,500 Cr : सालाना विदेशी मुद्रा बचत सिर्फ 8% DME blending से
- 250 kg/day : CSIR-NCL pilot plant की मौजूदा DME उत्पादन क्षमता
- 20% : BIS मानक IS 18698:2024 के तहत LPG में DME blending की अनुमति
DME Gas क्या है?

Dimethyl Ether (DME Gas) एक Synthetic gas है जिसका chemical formula है CH₃-O-CH₃ , सुनने में जटिल लगता है लेकिन इसके गुण बेहद सरल और व्यावहारिक हैं।
यह गैस 10 bar दबाव पर liquid बन जाती है बिल्कुल वैसे ही जैसे LPG सिलेंडर में Propane और Butane रहती है यही समानता इसे LPG का सबसे करीबी और व्यावहारिक विकल्प बनाती है।
DME Gas को methanol से बनाया जाता है और methanol कई स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है
- भारत के विशाल coal reserves (gasification प्रक्रिया द्वारा)
- कृषि अपशिष्ट और biomass (crop residue से)
- Captured CO₂: यानी वायुमंडल का प्रदूषण भी बन सकता है ईंधन
- Natural gas से भी methanol उत्पादन संभव
CSIR-NCL के वैज्ञानिकों ने एक patent-protected, indigenous catalyst विकसित किया है जो methanol को DME में बदलने की प्रक्रिया को सस्ता, तेज और efficient बनाता है।
इस catalyst की खूबी यह है कि यह पूरी तरह भारत में बना है कोई विदेशी तकनीक नहीं कोई royalty नहीं।
LPG vs DME Gas
| विशेषता / Parameter | LPG (Liquefied Petroleum Gas) | DME Gas (Dimethyl Ether) |
|---|---|---|
| स्रोत (Source) | मुख्यतः विदेशी आयात | कोयला, biomass, CO₂ — पूरी तरह स्वदेशी |
| जलने का तरीका (Combustion) | साफ जलती है, कम प्रदूषण | LPG से भी साफ — NOx, SOx, soot न्यूनतम |
| Cylinder/Infrastructure | मौजूदा system में fitted | 8% blending तक कोई बदलाव जरूरी नहीं |
| Thermal Efficiency | उच्च दक्षता | LPG के समान ऊर्जा उत्पादन |
| Pressure (भंडारण) | ~7-8 bar पर liquid | 10 bar पर liquid — LPG cylinder में सीधे भरा जा सकता है |
| विषाक्तता (Toxicity) | ज्वलनशील, सावधानी जरूरी | Non-toxic, non-carcinogenic, non-corrosive |
| उत्पादन लागत (Cost) | अंतरराष्ट्रीय कीमत पर निर्भर | अभी LPG से थोड़ा महंगा — scale-up के बाद कम होगी |
| BIS Standard | IS 4576 (established) | IS 18698:2024 — 20% blending तक approved |
CSIR-NCL की 20 साल की मेहनत
पुणे की CSIR-National Chemical Laboratory में वैज्ञानिक Thirumalaiswamy Raja की अगुवाई में एक team ने लगभग दो दशकों तक इस तकनीक पर काम किया है, यह सिर्फ एक lab experiment नहीं था यह एक राष्ट्रीय जरूरत का वैज्ञानिक जवाब था।
“जब वैश्विक chokepoints LPG supply को खतरे में डालते हैं तब भारतीय innovation में energy sovereignty सुरक्षित करने की शक्ति है। CSIR-NCL की indigenous DME technology घरेलू ईंधन से रसोई को powered कर सकती है।”
— पद्म विभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर, पूर्व Director General, CSIR
भारत को DME Gas की जरूरत क्यों?

Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत देश में 10.5 करोड़ LPG connections हैं और इनमें से अधिकांश connections गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के हैं जो LPG की कीमत में हर बार हुई बढ़ोतरी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
जब international market में तेल के दाम बढ़ते हैं तो सरकार को या तो subsidy बढ़ानी पड़ती है या आम नागरिक को महंगी गैस खरीदनी पड़ती है।
- हर साल Rs. 9,500 करोड़ की foreign exchange की बचत
- Ujjwala Yojana के 10.5 करोड़ घरों के लिए ~1,300 Tones/day DME उत्पादन की जरूरत
- Rupee पर import pressure कम होगा जिससे महंगाई में राहत
- वैश्विक संकट के समय भारत की energy sovereignty सुरक्षित रहेगी
Also Read: Stock Market Crash in India: पिछले 10 सालों में Sensex और Nifty की 5 सबसे बड़ी गिरावट
Clean Fuel Revolution
भारत के शहरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है जहाँ रोजाना करोड़ों चूल्हों से निकलने वाला धुआँ इस समस्या को और बढ़ाता है। DME इस मामले में LPG से भी कई गुना बेहतर है।
- Soot (कालिख): का उत्सर्जन लगभग शून्य
- NOx (Nitrogen Oxides): जो smog बनाते हैं – न्यूनतम मात्रा में
- SOx (Sulphur Oxides) : Acid rain का कारण नहीं के बराबर
- Particulate Matter (PM 2.5/PM 10): का उत्सर्जन बहुत कम
- CO₂ से बना DME: एक circular economy approach – carbon utilization को बढ़ावा
- Chlorofluorocarbons (CFCs) का विकल्प: Ozone layer के लिए भी बेहतर
CSIR-NCL ने Automotive Research Association of India (ARAI) पुणे के साथ मिलकर DME को automobiles में भी test किया है। एक auto-rickshaw में LPG-DME blend का सफल परीक्षण यह साबित करता है कि यह ईंधन सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं यह transport sector की भी तस्वीर बदल सकता है।
DME Gas के अन्य उपयोग
DME एक versatile fuel है। रसोई gas के अलावा इसके कई और उपयोग हैं जो इसे एक complete energy solution बनाते हैं, जैसे
- Automotive Fuel: Diesel के विकल्प के रूप में trucks और heavy vehicles में – बिना diesel particulate filter के भी emission standards पूरे होते हैं।
- Aerosol Propellant: Deodorants और sprays में CFC की जगह ozone-friendly विकल्प।
- Chemical Intermediate: Lower olefins, Dimethyl Sulfate और Methyl Acetate के उत्पादन में।
- Industrial Heating: Manufacturing plants में LPG की जगह direct use।
- Power Generation: Gas turbines में भी इसका उपयोग संभव है।
चुनौतियाँ जो अभी भी हैं
हर बड़ी technology की तरह DME के सामने भी कुछ व्यावहारिक चुनौतियाँ हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए
- Production Cost: फिलहाल DME की उत्पादन लागत LPG से अधिक है। Large-scale production के बाद यह cost competitive होगी।
- Methanol Supply Chain: Methanol की कीमत coal और natural gas से जुड़ी है जो volatile हो सकती है।
- Infrastructure Scale-up: Pilot से commercial scale तक जाने के लिए बड़ा capital investment जरूरी है।
- Consumer Awareness: नई technology को लेकर जन-जागरूकता और भरोसा बनाने में समय लगेगा।
- BIS Standard Support: IS 18698:2024 पहले से ही 20% blending की अनुमति देता है — यह एक बड़ा positive sign है।
अगर सरकार, industry और science तीनों मिलकर काम करें तो DME भारत की Energy story को हमेशा के लिए बदल सकती है।
Know More…
KDS Hotels
Discover more from Newz Ticks
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

