New Rental Laws 2025: Will the rent agreement remain valid in future also or not?

Rental Laws 2025

New Rental Laws 2025

New Rental Laws in Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश में अब किराये के समझौतों (Rent Agreement) का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकृत समझौते में लिखी शर्तें ही कानूनी रूप से मान्य होंगी और केवल इन्हीं के आधार पर कोर्ट में दावा किया जा सकेगा। संपत्ति की सुरक्षा के लिए इस कदम को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमे स्टाम्प शुल्क भी कम रखा गया है जो एक साल से अधिक के समझौतों के लिए 500 रुपये से लेकर अधिकतम 20000 रुपये तक होगा।

इस नियम से मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे और विवादों में कमी भी आएगी। स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल के अनुसार – यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। जिससे किराये संबंधी मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।

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New Rental Laws 2025 | रजिस्टर्ड एग्रीमेंट की शर्तें कानूनी रूप से मान्य

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उत्तर प्रदेश में अब किराये के समझौतों (Rent Agreement) को लेकर नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इन नियमों के तहत केवल पंजीकृत समझौते में लिखी शर्तें ही कानूनी रूप से मान्य होंगी। अगर समझे तो अभी तक Stamp Duty ज्यादा होने के कारण बहुत कम लोग ही Rent Agreement को पंजीकृत कराते हैं जिसमे ज्यादातर लोग सिर्फ 100 रुपये के स्टाम्प पर समझौता कर लेते हैं फलस्वरूप उसका कोई कानूनी महत्व नहीं होता था।

स्टाम्प और पंजीयन विभाग के आंकड़ों की गढ़ना के अनुसार पिछले एक साल में प्रदेश में केवल 86 हजार Rent Agreement ही पंजीकृत हुए हैं जबकि लाखों लोग घर, दुकान और ऑफिस किराये पर देते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने स्टाम्प शुल्क को कम करने और नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है।

इसके साथ ही एक साल तक के किराये समझौतों के लिए एक अलग पोर्टल बनाया जाएगा। इस पोर्टल पर एक तय फॉर्मेट उपलब्ध होगा जिसे डाउनलोड करके प्रिंट किया जा सकेगा। इस फॉर्मेट को स्टाम्प पर चिपकाने से इसे कानूनी मान्यता मिल जाएगी।

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अगर Rent Agreement पंजीकृत नहीं कराया जाता है तो उसके आधार पर कोर्ट में मुकदमा नहीं लड़ा जा सकेगा और न ही अपने अधिकार साबित किए जा सकेंगे। केवल समझौते में लिखी गई शर्तें ही मान्य होंगी और उन्हीं के आधार पर दावा किया जा सकेगा।

इस नए प्रस्ताव से मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फायदा होगा। इससे किराये संबंधी विवादों में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का यह कदम किरायेदारी व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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वर्तमान Rent Agreement एक्ट के नियमों के अनुसार

किराये के समझौतों (Rent Agreement) पर Stamp Duty अलग-अलग अवधि के आधार पर तय किया गया है।
आइये समझते हैं, एक साल के समझौते पर कुल किराये का 2% स्टाम्प शुल्क लगता है । वहीं, 5 साल के समझौते के लिए 3 साल के किराये का 2% शुल्क देना होता है। 10 साल के एग्रीमेंट पर 4 साल के किराये का 2% और 20 साल के समझौते पर 5 साल के किराये का 2% स्टाम्प शुल्क लागू होता है ।

वहीँ 30 साल के समझौते के लिए 6 साल के किराये का 2% शुल्क देना होता है। हालांकि 30 साल से अधिक अवधि के समझौतों पर बैनामे की तरह 7% स्टाम्प शुल्क लगता है। ये नियम किरायेदारी व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने और कानूनी विवादों को कम करने के लिए बनाए गए थे।

 

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद Rent Agreement से जुड़े नए नियम लागू होंगे।

इन नियमों के तहत, एक साल तक के किराये समझौतों पर कुल किराये का केवल 2% स्टाम्प शुल्क लगेगा। अगर किराया 2 लाख रुपये तक है तो Stamp Duty सिर्फ 500 रुपये होगा। वहीं अगर 5 लाख रुपये तक के किराये पर यह शुल्क महज 5000 रुपये रखा गया है।

अगर किराया एक करोड़ रुपये या इससे अधिक है तो स्टाम्प शुल्क केवल 20000 रुपये होगा। ये नए नियम किरायेदारी समझौतों को सरल और आसान बनाने के लिए लाए गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे पंजीकृत करा सकें और कानूनी सुरक्षा पा सकें।


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